Tarsem Singh Bains बाबा साहिब डॉ. आंबेडकर जी का मिशन ( साहिब श्री कांशी राम जी की नजर 'में ) ( SOME FACTS )
" मुझे , बाबा साहिब डॉ. भीम राव आंबेडकर जी का मिशन आगे बढ़ाने की प्रेरणा कैसे मिली ? " ................ कांशी राम
“ जिस इतिहास को हम पढ़ते हैं, बह जो व्यक्ति ताकत / सत्ता ( power ) में है, उसके पक्ष में ढाला हुआ है / इस लिए हमें भारत के इतिहास को अपने हक्क में ढालना है , जिसे हम ढालने की सिथ्ती में हैं / यदि हम ने इसे अपने हक्क में ढाल लिया तो उस से इतिहास और समाज में बहुत बड़ी तबदीली आ जाएगी / “
" मैं ( कांशी राम ) और ' परस राम ज्ञानी ' जब्बलपुर में एक कमरे में इकट्ठे रहते थे / मुझे (कांशी राम ) बाबा साहिब और उनके इज्म / वाद के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी , जबकि ' ज्ञानी जी ' दोआबा , पंजाब क्षेत्र से होने के कारण बाबा साहिब तथा उनके इज्म / वाद के बारे में बहुत ज्यादा जानते थे / 'परस राम ज्ञानी जी ', को 6 दिसम्बर 1956 , को बाबा साहिब के प्रिनिर्बान हो जाने से बहुत आघात लगा , जिस कारण उसने ( परस राम ज्ञानी ) ने 2 दिनों तक्क खाना नहीं खाया और लगातार सिगरटें ही पी कर समय निकाला / बह कुछ इस तरह से बोल रहा था कि, " हमारा सब कुछ लुट गिया है /" दो दिनों के बाद उसने बाबा सहिब के बारे में लिखना शुरू कर दिया कि बह इस तरह के थे और यह मत्त समझना कि बे ( बाबा साहिब ) मर चुके हैं , और हम अभी उनके मिशन को आगे ले जाने के लिए जीवित हैं / ' परस राम ज्ञानी ' ने मुझे ( कांशी राम ) समाज की बहुत बुरी तरह गिरी हुई हालत के बारे में बताया / ' परस राम गियानी ' आम तौर पर ब्रह्मिनो को गालियाँ निकालता था, जबकि मैंने ( कांशी राम ) अपनी पढाई के समय में एक ब्रह्मिन लड़के की मदद की थी तथा ब्रह्मिनो की बुरी हालत भी देखी थी // "
.........contd....... next commt....>>
18 hours ago · Unlike · 1
Tarsem Singh Bains contd.......>>>>
" मैंने ( कांशी राम ) अपनी सामाजिक चेतना करके उसकी ( ज्ञानी की ) मदद की, " और उस से अपनी शादी / विवाह ना करवाने की शिक्षा ली और सरकारी नौकरी ले कर अपने आपको सामाजिक कामों के लिए उपलब्ध करवाना भी सीखा /" ‘ ज्ञानी जी ‘ ने तो अपनी पत्नी को तलाक देने का भी फैसला तक्क कर लिया था , तांकि बह अपने आप को मिशन के लिए आजाद कर सकें / मेरी ( कांशी राम ) तरफ से समझाने के बाद ‘ ज्ञानी जी ‘ , तलाक ना देने के लिए तो मान गया , लेकिन , अपने बच्चे ना पैदा करने के लिए उसने अपना मन्न बना लिया था // मैं ( कांशी राम ) और ज्ञानी जो बोंड वाली नौकरियां कर रहे थे, बह छोड़ कर बिना बौंड बाली नौकरियां करने का फैसला कीया, और हम दोनों में से एक आदमी ही नौकरी करेगा और दूसरा समाज सेवा करेगा / मुझे ( कांशी राम ) देहरादून में नौकरी मिल गई तथा मैंने ' परस राम ज्ञानी ' को मदद करनी शुरू कर दी/
एक दिन मुझे ( कांशी राम ) उसका ( ज्ञानी का ) पत्र मिला कि, उसको गांव वालों ने बहुत पीटा है, उसके बाद उसका कोई पत्र नहीं आया / मैंने यह मान लिया कि 'ज्ञानी जी ' मारे गए हैं, क्योंकि मेरी तरफ से भेजी हुयी पैसे की मदद ( Money Order ) भी बापस आ गई थी // मैं ( कांशी राम ) अब इस दुबिधा में था कि , अब क्या कीया जाये ? और इस तरह मुझे बाबा साहिब के मिशन को आगे बढ़ाने में " परस राम ज्ञानी " जी से प्रेरणा मिली //
बाबा साहिब के मिशन को आगे ले जाने के लिए मैंने ' टाटा लोकोमोटिव ' में शेयरों आदि द्वारा काफी धन इकठ्ठा कर लिया था / बाद में मैंने ( कांशी राम ) पूना आर्डिनेंस फैक्ट्री में एक वैज्ञानिक की नौकरी कर ली // बहाँ मैं तीन (3 ) लोगों में से एक्स्पलोसिव ( Explosive ) और बारूदी सामान की खोज करने के लिए, ऍम . ए. पी. एच. डी. ( M . A . PHd. ) के लिए चुन लिया गया / आर्डिनेंस फैक्ट्री के प्रशासन में बंगाल , महाराष्ट्र और पंजाब में से ही ब्रह्मिन - बनिया ही ज्यादा थे / " Ordinance Factory में, 1957 से दो छुटियाँ , एक बाबा साहिब डॉ. आंबेडकर जी के जन्म दिन की तथा दूसरी बुद्धा जयंती के नाम से मनाई जाती थीं , परन्तु ब्रह्मिनो ने , वह दोनों ही छुटियाँ ख़त्म करके , एक तिलक जयंती तथा दूसरी दीवाली की छुटिओं में बदल दी / “
18 hours ago · Unlike · 1
Tarsem Singh Bains SO, WE MUST REMAIN THANKFULL TO SHRI " परस राम ज्ञानी" FOR INSPIRING SHRI KANSHI RAM JI, FOR TAKING THE AMBEDKARITE MOVEMENT AHEAD.
18 hours ago · Unlike · 2
Tarsem Singh Bains THOSE WHO PREACH THAT , ...>>> Mr. Khaparde had enlightened Mr. Kanshi Ram about the movement of Dr. Ambedkar...<<< ARE MISLEADING THE PEOPLE AND HAD SABOTAGED THE MOVEMENT. Tarsem Singh Bains बाबा साहिब डॉ. आंबेडकर जी का मिशन ( साहिब श्री कांशी राम जी की नजर 'में ) ( SOME FACTS ) " मुझे , बाबा साहिब डॉ. भीम राव आंबेडकर जी का मिशन आगे बढ़ाने की प्रेरणा कैसे मिली ? " ................ कांशी राम “ जिस इतिहास को हम पढ़ते हैं, बह जो व्यक्ति ताकत / सत्ता ( power ) में है, उसके पक्ष में ढाला हुआ है / इस लिए हमें भारत के इतिहास को अपने हक्क में ढालना है , जिसे हम ढालने की सिथ्ती में हैं / यदि हम ने इसे अपने हक्क में ढाल लिया तो उस से इतिहास और समाज में बहुत बड़ी तबदीली आ जाएगी / “ " मैं ( कांशी राम ) और ' परस राम ज्ञानी ' जब्बलपुर में एक कमरे में इकट्ठे रहते थे / मुझे (कांशी राम ) बाबा साहिब और उनके इज्म / वाद के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी , जबकि ' ज्ञानी जी ' दोआबा , पंजाब क्षेत्र से होने के कारण बाबा साहिब तथा उनके इज्म / वाद के बारे में बहुत ज्यादा जानते थे / 'परस राम ज्ञानी जी ', को 6 दिसम्बर 1956 , को बाबा साहिब के प्रिनिर्बान हो जाने से बहुत आघात लगा , जिस कारण उसने ( परस राम ज्ञानी ) ने 2 दिनों तक्क खाना नहीं खाया और लगातार सिगरटें ही पी कर समय निकाला / बह कुछ इस तरह से बोल रहा था कि, " हमारा सब कुछ लुट गिया है /" दो दिनों के बाद उसने बाबा सहिब के बारे में लिखना शुरू कर दिया कि बह इस तरह के थे और यह मत्त समझना कि बे ( बाबा साहिब ) मर चुके हैं , और हम अभी उनके मिशन को आगे ले जाने के लिए जीवित हैं / ' परस राम ज्ञानी ' ने मुझे ( कांशी राम ) समाज की बहुत बुरी तरह गिरी हुई हालत के बारे में बताया / ' परस राम गियानी ' आम तौर पर ब्रह्मिनो को गालियाँ निकालता था, जबकि मैंने ( कांशी राम ) अपनी पढाई के समय में एक ब्रह्मिन लड़के की मदद की थी तथा ब्रह्मिनो की बुरी हालत भी देखी थी // " .........contd....... next commt....>> 18 hours ago · Unlike · 1 Tarsem Singh Bains contd.......>>>> " मैंने ( कांशी राम ) अपनी सामाजिक चेतना करके उसकी ( ज्ञानी की ) मदद की, " और उस से अपनी शादी / विवाह ना करवाने की शिक्षा ली और सरकारी नौकरी ले कर अपने आपको सामाजिक कामों के लिए उपलब्ध करवाना भी सीखा /" ‘ ज्ञानी जी ‘ ने तो अपनी पत्नी को तलाक देने का भी फैसला तक्क कर लिया था , तांकि बह अपने आप को मिशन के लिए आजाद कर सकें / मेरी ( कांशी राम ) तरफ से समझाने के बाद ‘ ज्ञानी जी ‘ , तलाक ना देने के लिए तो मान गया , लेकिन , अपने बच्चे ना पैदा करने के लिए उसने अपना मन्न बना लिया था // मैं ( कांशी राम ) और ज्ञानी जो बोंड वाली नौकरियां कर रहे थे, बह छोड़ कर बिना बौंड बाली नौकरियां करने का फैसला कीया, और हम दोनों में से एक आदमी ही नौकरी करेगा और दूसरा समाज सेवा करेगा / मुझे ( कांशी राम ) देहरादून में नौकरी मिल गई तथा मैंने ' परस राम ज्ञानी ' को मदद करनी शुरू कर दी/ एक दिन मुझे ( कांशी राम ) उसका ( ज्ञानी का ) पत्र मिला कि, उसको गांव वालों ने बहुत पीटा है, उसके बाद उसका कोई पत्र नहीं आया / मैंने यह मान लिया कि 'ज्ञानी जी ' मारे गए हैं, क्योंकि मेरी तरफ से भेजी हुयी पैसे की मदद ( Money Order ) भी बापस आ गई थी // मैं ( कांशी राम ) अब इस दुबिधा में था कि , अब क्या कीया जाये ? और इस तरह मुझे बाबा साहिब के मिशन को आगे बढ़ाने में " परस राम ज्ञानी " जी से प्रेरणा मिली // बाबा साहिब के मिशन को आगे ले जाने के लिए मैंने ' टाटा लोकोमोटिव ' में शेयरों आदि द्वारा काफी धन इकठ्ठा कर लिया था / बाद में मैंने ( कांशी राम ) पूना आर्डिनेंस फैक्ट्री में एक वैज्ञानिक की नौकरी कर ली // बहाँ मैं तीन (3 ) लोगों में से एक्स्पलोसिव ( Explosive ) और बारूदी सामान की खोज करने के लिए, ऍम . ए. पी. एच. डी. ( M . A . PHd. ) के लिए चुन लिया गया / आर्डिनेंस फैक्ट्री के प्रशासन में बंगाल , महाराष्ट्र और पंजाब में से ही ब्रह्मिन - बनिया ही ज्यादा थे / " Ordinance Factory में, 1957 से दो छुटियाँ , एक बाबा साहिब डॉ. आंबेडकर जी के जन्म दिन की तथा दूसरी बुद्धा जयंती के नाम से मनाई जाती थीं , परन्तु ब्रह्मिनो ने , वह दोनों ही छुटियाँ ख़त्म करके , एक तिलक जयंती तथा दूसरी दीवाली की छुटिओं में बदल दी / “ 18 hours ago · Unlike · 1 Tarsem Singh Bains SO, WE MUST REMAIN THANKFULL TO SHRI " परस राम ज्ञानी" FOR INSPIRING SHRI KANSHI RAM JI, FOR TAKING THE AMBEDKARITE MOVEMENT AHEAD. 18 hours ago · Unlike · 2 Tarsem Singh Bains THOSE WHO PREACH THAT , ...>>> Mr. Khaparde had enlightened Mr. Kanshi Ram about the movement of Dr. Ambedkar...<<< ARE MISLEADING THE PEOPLE AND HAD SABOTAGED THE MOVEMENT.
" मुझे , बाबा साहिब डॉ. भीम राव आंबेडकर जी का मिशन आगे बढ़ाने की प्रेरणा कैसे मिली ? " ................ कांशी राम
“ जिस इतिहास को हम पढ़ते हैं, बह जो व्यक्ति ताकत / सत्ता ( power ) में है, उसके पक्ष में ढाला हुआ है / इस लिए हमें भारत के इतिहास को अपने हक्क में ढालना है , जिसे हम ढालने की सिथ्ती में हैं / यदि हम ने इसे अपने हक्क में ढाल लिया तो उस से इतिहास और समाज में बहुत बड़ी तबदीली आ जाएगी / “
" मैं ( कांशी राम ) और ' परस राम ज्ञानी ' जब्बलपुर में एक कमरे में इकट्ठे रहते थे / मुझे (कांशी राम ) बाबा साहिब और उनके इज्म / वाद के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी , जबकि ' ज्ञानी जी ' दोआबा , पंजाब क्षेत्र से होने के कारण बाबा साहिब तथा उनके इज्म / वाद के बारे में बहुत ज्यादा जानते थे / 'परस राम ज्ञानी जी ', को 6 दिसम्बर 1956 , को बाबा साहिब के प्रिनिर्बान हो जाने से बहुत आघात लगा , जिस कारण उसने ( परस राम ज्ञानी ) ने 2 दिनों तक्क खाना नहीं खाया और लगातार सिगरटें ही पी कर समय निकाला / बह कुछ इस तरह से बोल रहा था कि, " हमारा सब कुछ लुट गिया है /" दो दिनों के बाद उसने बाबा सहिब के बारे में लिखना शुरू कर दिया कि बह इस तरह के थे और यह मत्त समझना कि बे ( बाबा साहिब ) मर चुके हैं , और हम अभी उनके मिशन को आगे ले जाने के लिए जीवित हैं / ' परस राम ज्ञानी ' ने मुझे ( कांशी राम ) समाज की बहुत बुरी तरह गिरी हुई हालत के बारे में बताया / ' परस राम गियानी ' आम तौर पर ब्रह्मिनो को गालियाँ निकालता था, जबकि मैंने ( कांशी राम ) अपनी पढाई के समय में एक ब्रह्मिन लड़के की मदद की थी तथा ब्रह्मिनो की बुरी हालत भी देखी थी // "
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" मैंने ( कांशी राम ) अपनी सामाजिक चेतना करके उसकी ( ज्ञानी की ) मदद की, " और उस से अपनी शादी / विवाह ना करवाने की शिक्षा ली और सरकारी नौकरी ले कर अपने आपको सामाजिक कामों के लिए उपलब्ध करवाना भी सीखा /" ‘ ज्ञानी जी ‘ ने तो अपनी पत्नी को तलाक देने का भी फैसला तक्क कर लिया था , तांकि बह अपने आप को मिशन के लिए आजाद कर सकें / मेरी ( कांशी राम ) तरफ से समझाने के बाद ‘ ज्ञानी जी ‘ , तलाक ना देने के लिए तो मान गया , लेकिन , अपने बच्चे ना पैदा करने के लिए उसने अपना मन्न बना लिया था // मैं ( कांशी राम ) और ज्ञानी जो बोंड वाली नौकरियां कर रहे थे, बह छोड़ कर बिना बौंड बाली नौकरियां करने का फैसला कीया, और हम दोनों में से एक आदमी ही नौकरी करेगा और दूसरा समाज सेवा करेगा / मुझे ( कांशी राम ) देहरादून में नौकरी मिल गई तथा मैंने ' परस राम ज्ञानी ' को मदद करनी शुरू कर दी/
एक दिन मुझे ( कांशी राम ) उसका ( ज्ञानी का ) पत्र मिला कि, उसको गांव वालों ने बहुत पीटा है, उसके बाद उसका कोई पत्र नहीं आया / मैंने यह मान लिया कि 'ज्ञानी जी ' मारे गए हैं, क्योंकि मेरी तरफ से भेजी हुयी पैसे की मदद ( Money Order ) भी बापस आ गई थी // मैं ( कांशी राम ) अब इस दुबिधा में था कि , अब क्या कीया जाये ? और इस तरह मुझे बाबा साहिब के मिशन को आगे बढ़ाने में " परस राम ज्ञानी " जी से प्रेरणा मिली //
बाबा साहिब के मिशन को आगे ले जाने के लिए मैंने ' टाटा लोकोमोटिव ' में शेयरों आदि द्वारा काफी धन इकठ्ठा कर लिया था / बाद में मैंने ( कांशी राम ) पूना आर्डिनेंस फैक्ट्री में एक वैज्ञानिक की नौकरी कर ली // बहाँ मैं तीन (3 ) लोगों में से एक्स्पलोसिव ( Explosive ) और बारूदी सामान की खोज करने के लिए, ऍम . ए. पी. एच. डी. ( M . A . PHd. ) के लिए चुन लिया गया / आर्डिनेंस फैक्ट्री के प्रशासन में बंगाल , महाराष्ट्र और पंजाब में से ही ब्रह्मिन - बनिया ही ज्यादा थे / " Ordinance Factory में, 1957 से दो छुटियाँ , एक बाबा साहिब डॉ. आंबेडकर जी के जन्म दिन की तथा दूसरी बुद्धा जयंती के नाम से मनाई जाती थीं , परन्तु ब्रह्मिनो ने , वह दोनों ही छुटियाँ ख़त्म करके , एक तिलक जयंती तथा दूसरी दीवाली की छुटिओं में बदल दी / “
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